मेहंदी हसन साहब की गज़ल हिन्दी में

मैं छुपा सकूँगा कैसे तेरे प्यार को तेरा नाम बेखुदी में जो निकल गया जुवा से बडा मुख्तसर हैं किस्सा,बडा मुख्तसर फ़साना मुझे जब भी याद आया तेरे प्यार का फ़साना मै लिपट के रोया तेरे संगे-आस्तां से मै समझ रहा हूँ जालिम तेरी आंख का इशारा मै दिखाऊँ दाग़ दिल के तुझे यह नहीं […]

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