*तज़किरए सालिहात* #01 -📚

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*तज़किरए सालिहात* #01❤📚

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ 🌹❤

*हज़रते खदीजा रदिअल्लाहु तआला अन्हा*❤
ये रसूलुल्लाह ﷺ की सब से पहली बीवी और रफीकए हयात हैं ये खानदाने कुरैैश की बहुत ही बा वकार व मुमताज खातून है,इन के वालीद का नाम खुवैलद बीन असद और इन की माँ का नाम फातीमा बिन्ते जाइदा है, इन की शराफत और पाक दामनी की बिना पर तमाम मक्का वाले इन को *”ताहिरा”* के लकब से पुकारा करते थे, इन्होंने हुज़ूर ﷺ के अख्लाक व आदात और जमाले सूरत व कमाले सीरत को देख कर खुद ही आप से निकाह की रग़बत जाहीर की चुनान्चे अशरफे कुरैश के मजमअ़ में बाक़ायदा निकाह हुवा

यह रसूलुल्लाह ﷺ की बहुत ही जां निषार और वफा शिआ़र बीवी हैं और हुज़ूरे अक़्दस ﷺ को इन से बहुत ही बे पनाह मह़ब्बत थी चुनान्चे जब तक आप ज़िन्दा रहीं आप ﷺ ने किसी दूसरी औ़रत से निकाह़ नहीं फरमाया और यह मुसलसल पच्चीस साल तक मह़बूबे खुदा की जां निशार व खीदमत गुजारी के शरफ़ से सरफराज रही।हुज़ूर ﷺ को भी इन से इस कदर मह़ब्बत थी कि इन की वफात के बाद आप ﷺ अपनी महबूब तरीन बीवी ह़ज़रते आइशा से फरमाया करते थे कि खुदा की कसम ! खदीजा से बेहतर मुझे कोई बीवी नही मिली जब सब लोगों ने मेरे साथ कुफ्र किया उस वक्त वोह मुझ पर ईमान लाई

और जब सब लोग मुझे झुटला रहे थे उस वक्त उन्होने मेरी तस्दीक की और जिस वक्त कोई शख्स मुझे कोई चीज़ देने के लिये तय्यार न था उस वक्त ख़दीजा ने मुझे अपना सारा सामान दे दीया और उन्ही के शीकम से अल्लाह तआ़ला ने अवलाद अता फरमाई।
*जन्नती ज़ेवर, सफआ न. 478*
_येही माँएं है जिन की गोद में इस्लाम पलता था_
_इसी गै़रत से इन्सां नूर के सांचे में ढलता था _
_✍ बाकि अगली पोस्ट में..ان شاء الله_🌹🌹🌹🌹❤❤❤
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Inoor.in

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