तज़किरए सालिहात #05📚

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तज़किरए सालिहात #05📚

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ🌹

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ❤

🌹हज़रते ह़फ्सा रदिअल्लाहु तआला अन्हा🌹

यह भी रसूलुल्लाह ﷺ की मुकद्दस बीवी और उम्मत की माँओं में से है यह हज़रते अमीरुल मोअमिनीन उ़मर की बुलन्द इक्बाल साहिबजादी हैं और इन की वालिदा का नाम ज़ैनब बिन्ते मज़ऊन है जो एक मश्हूर सहाबिया है यह पहले हज़रते खुनैस बिन हुज़ाफा सहमी की ज़ौजिय्यत में थी और मियाँ बीवी दोनो हिज़रत कर के मदीनए मुनव्वरा चले गये थे मगर इन के शोहर जंगे उहुद मे शहीद हो कर वफात पा गये तो 3 हिज़री में रसूलुल्लाह ﷺ ने इन से निकाह फरमा लिया यह भी बहुत ही शानदार बुलन्द हिम्मत और सख़ी औरत थीं और फ़ह्म व फ़िरासत और हकगोई व हाज़िर जवाबी में अपने वालिद ही का मिज़ाज पाया था अकषर रोज़ादार रहा करती थीं और तिलावते कुरआने मजीद और दूसरी क़िस्म क़िस्म की इ़बादतों में मसरूफ़ रहा करती थीं इ़बादत गुज़ार होने के साथ साथ फ़िक़ह व हदीष के उ़लूम में भी बहुत मा’लूमात रखती थीं शा’बान 45हिज़री में मदीनए मुनव्वरा के अन्दर इन की वफात हुई हाकिमे मदीना मरवान बिन हकम ने नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और इन के भतीजों ने कब्र में उतारा और जन्नतुल बक़ीअ में दफ़्न हुई ब वक़्ते वफात इन की उम्र साठ या तिरसठ की थी।
📓जन्नती जेवर सफआ 484-485
🌹यही माँए है जिन की गोद में इस्लाम पलता था.!
इसी गै़रत से इन्सां नूर के सांचे में ढलता था 🌹
✍ बाकि अगली पोस्ट में..ان شاء الله
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