मेहंदी हसन साहब की गज़ल हिन्दी में

Hindi shayari

मैं छुपा सकूँगा कैसे तेरे प्यार को
तेरा नाम बेखुदी में जो निकल गया जुवा से

बडा मुख्तसर हैं किस्सा,बडा मुख्तसर फ़साना
मुझे जब भी याद आया तेरे प्यार का फ़साना
मै लिपट के रोया तेरे संगे-आस्तां से

मै समझ रहा हूँ जालिम तेरी आंख का इशारा
मै दिखाऊँ दाग़ दिल के तुझे यह नहीं गवारा
तेरा भेद खुल न जाए मेरे गम की दास्ताँ से

मेरी बेखुदी से तू भी कोई फायदा उठा ले
मै बना रहू तमासा तू मेरी हंसी उड़ा ले
न है कोई तुझसे शिकवा न गिला है आस्माँ से

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आखों में आए तो पानी दिल में रहे तो आग
जो भी गाये जल जाये यह प्यार है ऐसा राग

ऐ दिल तेरी आहों में असर है कि नहीं
जो हाल इधर है वो उधर हैं कि नहीं

दिल माही-ए बेआब की मानिन्द है बेताब
इस दर्द भरी शब की सहर है कि नहीं

जिनके लिए रातें मेरी बे ख़्वाब हुई हैं
उनको मेरे इस ग़म की खबर है कि नहीं

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किस तरह जाने बफा,शौक का इजहार करूं
गर इजाजत हो तो जी भर के तुझे प्यार करूं

तूने शरमा के सिमटने की अदा पाईं है
मेरा दिल ऐसी आदाओ का शैदाई है
क्यों न फिर मै तेरे शरमाने पे इसरार करूं
किस तरह जाने बफा, शौक का इजहार करूं

तेरी नजरें झुकी पलकों में छिपी रहती हैं
फिर से मै देख रहा हूँ ये क्या कहतीं हैं
ये जो कहतीं हैं तो इकरार मै सौ बार करूं
किस तरह जाने बफा शौक का इजहार करूं।

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ऐ जाने तमन्ना तेरा चर्चा न करेंगे
मर जायेंगे लेकिन तुझे रूसवा न करेंगे

होठों पे न लायेगे कभी तेरी कहानी
कर देंगे तेरे हिज्र में बर्बाद जवानी

टूटे हुए दिल का कभी शिकवा न करेंगे
ऐ जाने तमन्ना तेरा चर्चा न करेंगे

हम अपना कोई गम न दिखायेगे जहाँ को
फरियाद उठी दिल से तो सी लेंगे जुवा को
हम राग मोहब्बत कभी अफशा न करेंगे
ऐ जाने तमन्ना तेरा चर्चा न करेंगे

दिल मे तो रहेगा तेरी यादों का बसेरा
लेंगे न कभी नाम किसी बज्म में तेरा
भूले से भी तौहीन तमन्ना न करेंगे
ऐ जाने तमन्ना तेरा चर्चा न करेंगे

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क्यों शराबी शराब पीता है
और फिर बेहिसाब पीता है

जानता है कि चीज़ है ये बुरी
फिर भी खाना खराब पीता है

इस कदर गम मिले हैं दुनिया में
हम न पीते तो मर गए होते
गर सहारा न जाम का होता
जाने कब से बिखर गए होते

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