सवाल कसम का कफ्फारह क्या है और क्या खुदा के सिवा किसी की कसम खाई जा सकती है

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सवाल कसम का कफ्फारह क्या है और क्या खुदा के सिवा किसी की कसम खाई जा सकती है📚

जवाब खुदा की ज़ात व सिफ्फात या उसके कलाम की कसम खाना कसमे शरई है,अब अगर गुज़श्ता यानि पास्ट की किसी बात पर कसम खाई मसलन ये कहा कि “खुदा की कसम मैंने ये काम नहीं किया” तो अगर वो सच्चा है तो ठीक वरना अगर झूठा है तो गुनाह है उसपर तौबा वाजिब है मगर कफ्फारह नहीं देना होगा,और आइंदा यानि फ्यूचर के किसी काम पर कसम खाई और तोड़ दी तो कफ्फारह है मसलन ये कहे कि “खुदा की कसम मैं तुम्हारे घर नहीं आऊंगा” तो इस सूरत में अगर गया तो कसम टूट जायेगी और कफ्फारह देना होगा
कसम का कफ्फारह ये है कि अगर साहिबे माल नहीं है तो लगातार 3 रोज़े रखे और माल पर क़ुदरत है तो 10 मिस्कीन को दोनों वक़्त पेट भरकर खाना खिलाये या उन्हें कपड़ा पहनाये या एक ही फक़ीर को 10 दिनों तक दोनों वक़्त खाना खिलाये या 20 वक़्त के खाने का पैसा किसी एक फक़ीर को दे दे,इनमें से कुछ भी करे कफ्फारह अदा हो जायेगा
युंही खुदा के सिवा किसी और की कसम खाना भी जायज़ नहीं है बल्कि इमाम राज़ी अलैहिर्रहमा फरमाते हैं कि अगर लोग जिहालत की बिना पर ऐसी कसमें न खातें हों मसलन “तेरी कसम मेरी कसम जान की कसम रोज़ी की कसम” तो मैं उनपर हुक्मे कुफ्र लगाता,और आलाहज़रत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की कसम खाना जायज़ नहीं बे अदबी है तौबा करे,और सिवाये कसमे शरई के किसी और का कफ्फारह अदा करना जायज़ नहीं

(बहारे शरीयत,जिल्द 9,सफह 23)📚
(अलमलफूज़,हिस्सा 4,सफह 71)

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